Motivation story
Meरी कलम से : इतिहास
#सिर्फ पढिये नहीं,
इतिहास रचिये भी
है #वही सूरमा इस जग में,#9616222424#
...........<<जो अपनी राह बनाता है। कोई चलता है पद चिन्हों पर, कोई पद चिन्ह बनाता है।/>>
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह
‘दिनकर’ जी एक कविता की ये कुछ
पंक्तियाँ मेरे दिमाग में कल से
काफी उथल पुथल मचाये हुए हैं।
सही ही तो कहा है महाकवि
दिनकर जी ने…इस पूरे संसार की
अगर जनसँख्या की गणना की जाये
तो अरबों खरबों की जनसँख्या
होगी लेकिन अगर सफल व्यक्तियों
की गणना की जाये तो कुछ मुट्ठी
भर लोगों के नाम ही histri me hai.
हम पैदा होते हैं, स्कूल जाते हैं,
दूसरों व्यक्तियों द्वारा रचे
इतिहास को बड़े चाव से पढ़ते हैं और
गर्व महसूस करते हैं कि हमारी
भारत भूमि पर कितने वीर और
महापुरुषों ने जन्म लिया है लेकिन
क्या कभी आपने सोचा कि जब आने
वाली पीढ़ी आयेगी और इतिहास
पढ़ेगी तो क्या आपका भी नाम उस
इतिहास में होगा या नहीं ?
शायद नहीं…..क्योंकि हम सिर्फ
इतिहास पढ़ते हैं….और इतिहास
बनाने वाले वो और ही होते हैं
जिनमें जूनून कूट कूट कर भरा होता
है, जिनको हारना किसी भी शर्त
पर मंजूर नहीं होता।
जरा याद कीजिये अपने
पूर्वराष्ट्रपति अब्दुल कलाम
आजाद जी का बचपन, जब छोटे थे
तो खर्चा चलाने के लिए साईकिल
पर अख़बार बांटा करते थे। कौन
जानता था कि यही बच्चा आगे
चलकर मिसाइल मैन बनेगा। ऐसे
लोगों के जीवन से ही इतिहास
बनता है।
जरा याद कीजिये अरुणिमा
सिन्हा को, जिसने एक हादसे में
अपने दोनों पैरों की ताकत को
गँवा दिया था लेकिन उसके अंदर
जूनून था कुछ कर गुजरने का। दोनों
पैरों की ताकत गँवा देने के बावजूद
अरुणिमा सिन्हा ने सर्वोच्च
पर्वतशिखर माउन्ट एवरेस्ट पर
विजय प्राप्त की। ऐसे लोगों से
सीखिए कि इतिहास का हिस्सा
कैसे बना जाता है।
इतिहास पढ़ने वाले तो करोड़ों हैं
मेरे दोस्त….आज आप पढ़ते हैं, कल
कोई और पढ़ेगा लेकिन इतिहास
लिखने वाला कोई कोई ही होता
है।
आप भी सफल हो सकते हैं और आप भी
कुछ बड़ा कर सकते हैं लेकिन इसके
लिए आपको अपना नजरिया
बदलना होगा। अपने अंदर कुछ बड़ा
करने का जूनून पैदा करना होगा।
खुद पर आत्मविश्वास रखकर दृढ़
संकल्प लेना होगा कि हम भी कुछ
बड़ा करेंगे।
याद रखिये, सफल होना उतना
आसान नहीं है लेकिन इतिहास
गवाह है कि प्रयास करने वालों ने
हमेशा सफलता को प्राप्त किया
है। कोशिश करते रहिये दोस्तों
ताकि आपकी पहचान भीड़ में कहीं
खो कर ना रह जाये।
तो मैं स्वयं इस बात का दृढ़ संकल्प
लेता हूँ और आप भी मेरे साथ दृढ़
संकल्प लीजिये कि हम भी कुछ ऐसा
करेंगे कि हमारी आने वाली पीढ़ी
हमारा नाम भी इतिहास में पढ़े।
हम भीड़ का हिस्सा नहीं हैं, वो
और हैं जो सिर्फ इतिहास पढ़ते हैं,
हम तो इतिहास गढ़ने वालों में से
हैं।
अगर आपके दिल से भी ऐसी ही
आवाज आये तो मेरे साथ संकल्प लेते
हुए नीचे कमेंट बॉक्स में लिख
दीजिये कि आज के बाद हम पूरे दिल
ओ जान से मेहनत करेंगे और एक नया
इतिहास गढ़ेंगे। धन्यवाद!!!!
By maan singh
#सिर्फ पढिये नहीं,
इतिहास रचिये भी
है #वही सूरमा इस जग में,#9616222424#
...........<<जो अपनी राह बनाता है। कोई चलता है पद चिन्हों पर, कोई पद चिन्ह बनाता है।/>>
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह
‘दिनकर’ जी एक कविता की ये कुछ
पंक्तियाँ मेरे दिमाग में कल से
काफी उथल पुथल मचाये हुए हैं।
सही ही तो कहा है महाकवि
दिनकर जी ने…इस पूरे संसार की
अगर जनसँख्या की गणना की जाये
तो अरबों खरबों की जनसँख्या
होगी लेकिन अगर सफल व्यक्तियों
की गणना की जाये तो कुछ मुट्ठी
भर लोगों के नाम ही histri me hai.
हम पैदा होते हैं, स्कूल जाते हैं,
दूसरों व्यक्तियों द्वारा रचे
इतिहास को बड़े चाव से पढ़ते हैं और
गर्व महसूस करते हैं कि हमारी
भारत भूमि पर कितने वीर और
महापुरुषों ने जन्म लिया है लेकिन
क्या कभी आपने सोचा कि जब आने
वाली पीढ़ी आयेगी और इतिहास
पढ़ेगी तो क्या आपका भी नाम उस
इतिहास में होगा या नहीं ?
शायद नहीं…..क्योंकि हम सिर्फ
इतिहास पढ़ते हैं….और इतिहास
बनाने वाले वो और ही होते हैं
जिनमें जूनून कूट कूट कर भरा होता
है, जिनको हारना किसी भी शर्त
पर मंजूर नहीं होता।
जरा याद कीजिये अपने
पूर्वराष्ट्रपति अब्दुल कलाम
आजाद जी का बचपन, जब छोटे थे
तो खर्चा चलाने के लिए साईकिल
पर अख़बार बांटा करते थे। कौन
जानता था कि यही बच्चा आगे
चलकर मिसाइल मैन बनेगा। ऐसे
लोगों के जीवन से ही इतिहास
बनता है।
जरा याद कीजिये अरुणिमा
सिन्हा को, जिसने एक हादसे में
अपने दोनों पैरों की ताकत को
गँवा दिया था लेकिन उसके अंदर
जूनून था कुछ कर गुजरने का। दोनों
पैरों की ताकत गँवा देने के बावजूद
अरुणिमा सिन्हा ने सर्वोच्च
पर्वतशिखर माउन्ट एवरेस्ट पर
विजय प्राप्त की। ऐसे लोगों से
सीखिए कि इतिहास का हिस्सा
कैसे बना जाता है।
इतिहास पढ़ने वाले तो करोड़ों हैं
मेरे दोस्त….आज आप पढ़ते हैं, कल
कोई और पढ़ेगा लेकिन इतिहास
लिखने वाला कोई कोई ही होता
है।
आप भी सफल हो सकते हैं और आप भी
कुछ बड़ा कर सकते हैं लेकिन इसके
लिए आपको अपना नजरिया
बदलना होगा। अपने अंदर कुछ बड़ा
करने का जूनून पैदा करना होगा।
खुद पर आत्मविश्वास रखकर दृढ़
संकल्प लेना होगा कि हम भी कुछ
बड़ा करेंगे।
याद रखिये, सफल होना उतना
आसान नहीं है लेकिन इतिहास
गवाह है कि प्रयास करने वालों ने
हमेशा सफलता को प्राप्त किया
है। कोशिश करते रहिये दोस्तों
ताकि आपकी पहचान भीड़ में कहीं
खो कर ना रह जाये।
तो मैं स्वयं इस बात का दृढ़ संकल्प
लेता हूँ और आप भी मेरे साथ दृढ़
संकल्प लीजिये कि हम भी कुछ ऐसा
करेंगे कि हमारी आने वाली पीढ़ी
हमारा नाम भी इतिहास में पढ़े।
हम भीड़ का हिस्सा नहीं हैं, वो
और हैं जो सिर्फ इतिहास पढ़ते हैं,
हम तो इतिहास गढ़ने वालों में से
हैं।
अगर आपके दिल से भी ऐसी ही
आवाज आये तो मेरे साथ संकल्प लेते
हुए नीचे कमेंट बॉक्स में लिख
दीजिये कि आज के बाद हम पूरे दिल
ओ जान से मेहनत करेंगे और एक नया
इतिहास गढ़ेंगे। धन्यवाद!!!!
By maan singh
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